लड़की को बचपन से ही लज्जा का आभूषण पहनाकर, निर्लज्जता की बातें क्यो..? (एक विचार)
********************************************
मैं मानती हूँ, लज्जा शर्म नारी को शोभित करने वाला बहुत ही आकर्षित और खूबसूरत आभूषण है! ये नारी के व्यक्तित्व को एक अलग ही निखार देता प्रतीत होता है! परन्तु कभी सोचा है इस आभूषण को धारण करने वाली स्त्रियों को न जाने कितनी गंदी सोच और कितनी ही अपमान जनक स्थिति का सामना करना पड़ता है ..?
वो लोक लाज व शर्म के चलते अपनी स्थिति से किसी को अवगत भी नही करा सकती, क्यो..??
क्योंकि उसे बचपन से ही सिखाया जाता है लज्जा आपका गहना है, इसको आपने हमेशा पहनना है... लड़की इसका सर झुका कर पालन भी करती है परंतु मुझे समझ नही आता जब लड़की को लज्जा का आभूषण बचपन से ही पहना दिया जाता है तो फिर उनके साथ निर्लज्जता की बातें क्यो की जाती है...?
अक्सर देखा गया है राह चलते लड़कियों के साथ छेड़छाड़ होती है वो कई बार लज्जा के करण चुप लगा जाती है , फेसबुक पर ही बहुत से मित्र, या ऑफिस में सहकर्मचारी अश्लीलता की हद तक पार कर देते है ...
ऐसी परिस्तिथि में अपने संस्कार व गले मे जबर्दस्ती पहनाये गये लज्जा नामक आभूषण के चलते स्त्री खुद में ही घुट कर रह जाती है..
और अगर कोई स्त्री उन सब के विरुद्ध आवाज़ उठाना चाहे तो उसे निर्लज्ज की उपलब्धि से नवाज़ दिया जाता है....
मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूँगी अगर सच मे ही लज्जा स्त्री का गहना है तो इसे सदैव धारण किये रहने में आप स्त्री को प्रेरित व सहयोग करें ऐसी स्थिति उत्पन्न न करें कि वो अपने आत्मसम्मान की ख़ातिर इस आभूषण का परित्याग कर दे....
©️✍🏻पूनम बागड़िया "पुनीत"
(नई दिल्ली)